उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का हब बन रहा है। वैश्विक टेक कंपनियां और राज्य सरकार मिलकर लखनऊ को देश का पहला AI सिटी बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
लखनऊ में InMobi का बड़ा दाँव
एआई-समर्थित तकनीक की वैश्विक कंपनी InMobi ने लखनऊ में अपना नया टेक्नोलॉजी सेंटर शुरू किया है। इससे लखनऊ InMobi के वैश्विक इनोवेशन नेटवर्क का हिस्सा बन गया है।
कंपनी उन शुरुआती वैश्विक डीप-टेक फर्मों में से है जो लखनऊ की बढ़ती टेक प्रतिभा का उपयोग कर रही हैं। यह सेंटर Generative AI, Machine Learning Operations (MLOps), automation और बड़े पैमाने पर AI Infrastructure के विकास पर काम करेगा।
इनमोबी यहां 500 डीप-टेक इंजीनियरों, डेटा साइंस प्रोफेशनल्स और प्रोडक्ट स्पेशलिस्ट्स को नियुक्त करेगी। आने वाले समय में यह पहल 3,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगी।
यह निवेश 2029 तक उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प के अनुरूप है। साथ ही यह दिखाता है कि बड़ी टेक कंपनियाँ अब महानगरों से बाहर भी विस्तार कर रही हैं।
IndiaAI मिशन से ₹10,732 करोड़ की बढ़त
भारत सरकार ने भी लखनऊ को बड़ा सहारा दिया है। मार्च 2024 में स्वीकृत IndiaAI मिशन के तहत लखनऊ को ₹10,732 करोड़ का आवंटन किया गया है।
इस फंड से 10,000 GPU, Multi-Model language Models और एक AI Inovation Center तैयार किए जाएंगे। यह निवेश देश में सबसे बड़ा है और किसी भी अन्य तकनीकी परियोजना से 67% ज्यादा है।
राज्य सरकार जल्द ही विजन 2047 के अनुरूप एआई नीति का मसौदा पेश करेगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे उत्तर प्रदेश देश का नया IT और AI Destination बनेगा।
डबल इंजन सरकार यानी केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व, प्रदेश की जनता के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
प्रशिक्षण और स्किलिंग पहल
राज्य सरकार की AIPragya पहल के तहत 10 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी और डेटा एनालिटिक्स पर जोर है।
हर महीने 1.5 लाख युवाओं, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों, ग्राम प्रधानों और किसानों को इंडस्ट्री-रेडी सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। इस कार्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, गूगल और गुवी जैसे टेक दिग्गज साझेदार हैं।
इस प्रशिक्षण में महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान नेटवर्क्स को भी जोड़ा जा रहा है।
AI से स्मार्ट गवर्नेंस
कई क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान लागू किए जा चुके हैं। 17 नगर निगमों और गौतम बुद्ध नगर में सीसीटीवी निगरानी, फेस रिकग्निशन, नंबर प्लेट ट्रैकिंग और एसओएस अलर्ट सिस्टम को 112 हेल्पलाइन और पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है।
लखनऊ में जल्द ही हाई-टेक एआई-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू होगा। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में AI आधारित स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम की प्रक्रिया पहले से चल रही है।
राज्य की 70 जेलों में “जार्विस” AI मॉनिटरिंग सिस्टम सक्रिय है, जो कैदियों पर 24×7 निगरानी रखता है।
कृषि और भूमि प्रबंधन में AI
यूपी एग्रीस प्रोजेक्ट के तहत 10 लाख किसानों को एआई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। इसमें स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन मैपिंग, कीट पहचान और डिजिटल मार्केट एक्सेस जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इन परियोजनाओं में शामिल किया गया है। राजस्व विभाग में सैटेलाइट इमेजिंग और AI Algorithms का उपयोग भूमि अभिलेख प्रबंधन और एकीकरण में हो रहा है।
लखनऊ का AI भविष्य
वैश्विक टेक कंपनियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से लखनऊ तेजी से बदल रहा है। बड़े निवेश, प्रशिक्षण कार्यक्रम और उन्नत एआई सिस्टम की वजह से शहर देश का पहला AI सिटी बनने जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव न केवल रोजगार पैदा करेगा बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाएगा।




