अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयात शुल्क लगाकर भारत सहित कई देशों पर दबाव डालने की कोशिश की है। इन टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार ने अब मिशन मोड में काम शुरू कर दिया है। आने वाले 100 दिनों में ऐसे बड़े आर्थिक फैसले लिए जाएंगे जिनका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर होगा।
सरकार ने बड़े आर्थिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा शुरू कर दी है। मुख्य फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं:
- चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को नया रूप देना
- ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देना
- स्टार्टअप्स को अधिक टैक्स राहत देना
- विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना
- पर्यावरण संबंधी नियमों को आसान बनाना
पीएम मोदी की अगुवाई में उच्च स्तरीय बैठक
रविवार (17 अगस्त) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुधारों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रेल मंत्री पीयूष गोयल (दोहरे दायित्व में) और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पीएम मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि सुधारों को मिल-जुलकर और समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगा ताकि आम जनता जल्दी इसके नतीजे महसूस कर सके। बैठक में यह भी तय हुआ कि सुधारों की एक स्पष्ट कार्ययोजना बनेगी। उसकी निगरानी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्तर से होगी। सुधारों की पूरी सूची अगले 100 दिनों में तैयार कर लागू की जाएगी।
निर्यात बढ़ाने और चीन पर निर्भरता घटाने की ज़रूरत
बैठक में माना गया कि भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति के लिए निर्यात बढ़ाना होगा। विदेशी निवेश लाना होगा। इस समय भारत चीन से 40.66 अरब डॉलर का आयात करता है, जबकि केवल 5.76 अरब डॉलर का निर्यात करता है। यह व्यापार असंतुलन भारत के हित में नहीं है। इसे सुधारने के लिए सरकार निर्यात पर ध्यान देगी और चीन पर निर्भरता कम करेगी।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 18–19 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। चीन ने खाद, रेयर-अर्थ मिनरल्स और टनल-बोरिंग मशीनों की सप्लाई फिर से शुरू करने और पाबंदियां कम करने पर सहमति जताई। ये सप्लाई भारत की कृषि, आधारभूत ढांचे और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों में विविधीकरण शुरू कर चुका है ताकि किसी एक देश पर निर्भरता का ख़तरा दूर किया जा सके।
यह व्यापार घाटा चिंता का विषय है। अधिक निर्भरता किसी एक राष्ट्र पर भविष्य में बड़ा जोखिम बन सकती है। यही गलती यूरोपीय देशों ने की जब वे रूस के तेल और गैस पर ज़्यादा निर्भर हो गए। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उन्हें अपने घरेलू तेल और गैस की ज़रूरतें पूरी करने में कठिनाई हुई।
स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को राहत
सरकार स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों के लिए टैक्स राहत की तैयारी कर रही है। पर्यावरणीय प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया जाएगा ताकि निवेशकों को कारोबार करने में कम बाधाएं आएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में टैक्स कटौती की घोषणा की, जो अमेरिकी टैरिफ के दबाव से जूझ रही घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए राहत का काम करेगी।
100 दिन की योजना
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने 100 दिन का एक्शन-प्लान तैयार किया है। 15 क्षेत्रों की सूची बनाई गई है जहां त्वरित सुधार लागू किए जाएंगे। पीएम मोदी ने लक्ष्य रखा है कि ये सुधार 2022 तक पूरे हो जाएं। वहीं, दीर्घकालिक लक्ष्य है कि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाया जाए।
नए निवेश आकर्षित करने के कदम
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस पर जोर देगी। इसमें आसान नियम, तेज़ी से अनुमतियाँ और अधिक व्यवसाय-अनुकूल माहौल शामिल होगा। स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भरता और वित्तीय सुधारों की एक नई श्रृंखला पर ज़ोर दिया।
इस तरह मोदी सरकार इस असामान्य भू-आर्थिक बदलाव को समझते हुए हर आवश्यक कदम उठा रही है ताकि ट्रंप के टैरिफ से पैदा हुए आर्थिक ख़तरों को कम किया जा सके। इससे न केवल भारत अन्यायपूर्ण टैरिफ का सामना कर पाएगा, बल्कि भविष्य की किसी भी आर्थिक दबाव-नीति से निपटने के लिए और मज़बूत बन सकेगा।
