Thursday, March 26, 2026
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2025 के अंत में भारत आ सकते हैं पुतिन! ट्रम्प टैरिफ के बीच मॉस्को जाकर S जयशंकर ने की मुलाकात, $100 अरब के व्यापार पर चर्चा

ऊर्जा और व्यापार के अलावा रक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान से जुड़े हालात की समीक्षा की गई। जयशंकर ने दोहराया कि भारत आतंकवाद पर ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति पर कायम है।

विदेश मंत्री S जयशंकर ने गुरुवार (21 अगस्त) को रूस की तीन दिवसीय यात्रा पूरी की। मास्को रवाना होने से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात की। अमेरिका के अनुचित और अन्यायपूर्ण शुल्कों ने कुछ ही हफ्तों में भारत, चीन और रूस को और निकट ला दिया है।

जयशंकर की मॉस्को यात्रा में उच्च स्तरीय कूटनीति के साथ आर्थिक व्यावहारिकता भी शामिल रही और इसमें यूक्रेन युद्ध तथा भारत के ऊर्जा व्यापार से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।

राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात

यात्रा के अंतिम दिन जयशंकर ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भेंट की। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की समीक्षा की और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की, खासकर यूक्रेन संघर्ष पर।

जयशंकर ने बाद में ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि यह बैठक सौहार्दपूर्ण और सार्थक रही। उन्होंने जोर दिया कि भारत हमेशा से विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से करने की अपील करता आया है।

इस दौरान भारत में पुतिन की आगामी यात्रा की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। उम्मीद है कि रूसी राष्ट्रपति 2025 के अंत (संभवत: नवंबर या दिसंबर) में नई दिल्ली में वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

ऊर्जा और आर्थिक सहयोग पर फोकस

जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से लंबी बातचीत की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा साझेदारी को द्विपक्षीय रिश्तों का मुख्य स्तंभ बताया।

लावरोव ने मौजूदा हाइड्रोकार्बन सहयोग की सफलता का जिक्र किया और रूस के फार ईस्ट व आर्कटिक क्षेत्रों में नए संयुक्त प्रोजेक्ट्स का प्रस्ताव रखा। जयशंकर ने इन विचारों का स्वागत किया और कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भारत की विकास यात्रा के लिए अहम है।

दोनों पक्षों ने व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया। इसके लिए भुगतान प्रणाली को सुगम बनाने, टैरिफ बाधाओं को खत्म करने और भारत–यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति बनी।

‘सबसे स्थिर साझेदारियों में से एक’

संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने भारत–रूस संबंधों की मजबूती को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, “द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भारत और रूस के रिश्ते दुनिया की सबसे स्थिर साझेदारियों में रहे हैं।” उन्होंने भू-राजनीतिक समझ, नेतृत्व स्तर पर संवाद और जनता के बीच सद्भावना को इस रिश्ते के स्तंभ बताया।

दोनों देशों ने BRICS, G20 और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग जारी रखने की पुष्टि की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अंतर-सरकारी आयोग की बैठक

यात्रा के दौरान जयशंकर ने रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ 26वें भारत–रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की सह-अध्यक्षता की। इसमें व्यापार, तकनीक, कनेक्टिविटी और स्किल्ड लेबर जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

भविष्य के सहयोग को लेकर एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों मंत्रियों ने भारत–रूस बिज़नेस फोरम को भी संबोधित किया, जहां यह सहमति बनी कि उद्योग जगत की राय को आयोग के वर्किंग ग्रुप्स से जोड़ा जाएगा।

अमेरिका से तनातनी

जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हुई जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने हाल ही में भारतीय निर्यातों पर 50% टैरिफ लगा दिए हैं। यह कदम रूस से भारत के रियायती तेल आयात को लेकर उठाया गया है।

भारत ने इन टैरिफ को अनुचित और नुकसानदेह बताया है। वहीं मॉस्को ने इन्हें “नव-औपनिवेशिक” करार दिया। रूस ने घोषणा की कि भारत को बिना रुकावट तेल आपूर्ति के लिए विशेष तंत्र बनाया जाएगा और सभी तेल आयात पर अतिरिक्त 5% छूट भी दी जाएगी।

मॉस्को में बोलते हुए जयशंकर ने वाशिंगटन की आलोचना को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार नहीं है, बल्कि अमेरिका से भारत का तेल आयात बढ़ा है। “यह समझ से परे है कि केवल भारत को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है,” उन्होंने कहा।

सुरक्षा और क्षेत्रीय मसले और आगे की राह

ऊर्जा और व्यापार के अलावा रक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान से जुड़े हालात की समीक्षा की गई। जयशंकर ने दोहराया कि भारत आतंकवाद पर ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति पर कायम है।

यात्रा ने भारत में होने वाले अगले वार्षिक शिखर सम्मेलन की जमीन तैयार कर दी। दोनों पक्षों ने व्यापार विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग को प्रमुख प्राथमिकताएं माना। जयशंकर ने लावरोव को जल्द नई दिल्ली आने का न्योता भी दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के व्यवहार के कारण भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और यह देशों को अपनी कूटनीतिक संबंधों में विविधता लाने के लिए प्रेरित कर रहा है। भारत, चीन और रूस की आपसी सहभागिता बढ़ी है, और एक साझा खतरे की मौजूदगी के चलते ये तीनों देश साझा मुद्दों पर एकजुट होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मास्को यात्रा इस बढ़ते संवाद का हिस्सा हैं।

डॉ. जयशंकर की मॉस्को यात्रा ने यह संदेश दिया कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत कूटनीति, ऊर्जा और व्यापार—तीनों पर संतुलन साध रहा है। यह भी साफ हुआ कि अमेरिका के दबावों के बावजूद भारत–रूस रिश्ते स्थिर और मजबूत बने हुए हैं।

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A Failed Shuttler and an upcoming geopolitical analyst, who always try to bring a different angle of any geopolitical event. I spend my spare time in reading non-fictional books, cooking food and spending time on sports.
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