अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रियों में पहला भारतीय बनने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 41 दिनों बाद लखनऊ पहुंचे। उनके साथ पत्नी कामना और छह साल के बेटे किआंश भी थे। एयरपोर्ट पर स्कूली बच्चे अंतरिक्ष यात्री बनकर उनका स्वागत किया। हजारों लोग तिरंगे लेकर पहुंचे थे और ड्रम बजाकर, “भारत माता की जय” के जयकारे लगाकर उनका जोरदार अभिनंदन किया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव किया। इसके बाद शुभांशु थार जीप में सवार होकर रोड शो करते हुए अपने स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) पहुंचे। रोड के दोनों ओर लोग खड़े होकर उनका स्वागत करते रहे।
मुख्यमंत्री योगी ने दी शुभकामनाएं
शुभांशु शुक्ला अपनी पत्नी और बेटे के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री ने गेट पर उनका स्वागत किया, फूलों का बुके दिया और घर के अंदर सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में डिप्टी सीएम और महापौर ने भी शुभांशु और उनके परिवार को बधाई दी। शुक्ला के अंतरिक्ष मिशन पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई, जिसने समारोह का उत्साह और बढ़ा दिया।
शुभांशु शुक्ला के नाम छात्रवृत्ति की घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुभांशु शुक्ला के नाम पर स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की। यह छात्रवृत्ति उन छात्रों को मिलेगी जो उच्च शिक्षा के लिए अंतरिक्ष तकनीक में रुचि रखते हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में तीन साल पहले तक स्पेस टेक्नोलॉजी के कोर्स नहीं थे, लेकिन अब 12 से अधिक कॉलेजों में यह विषय पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग को निर्देश दिया कि वे शुक्ला के अनुभव का लाभ छात्रों और विभाग के विकास के लिए उठाएं।
राज्य अतिथि का दर्जा व सुरक्षा व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार ने शुभांशु शुक्ला को राज्य अतिथि का दर्जा दिया है। उनके रहने-खाने से लेकर सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए हैं। लखनऊ में उन्हें स्टेट गेस्ट हाउस में ठहराया गया है। उनकी सुरक्षा एक डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। उनके मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक पुलिस द्वारा उन्हें एस्कॉर्ट गाड़ी भी उपलब्ध कराई गई है। यह सब व्यवस्था शुभांशु के प्रति प्रदेश सरकार की सम्मान भावना को दर्शाती है।
भावुक स्वागत और प्रेरणादायक संवाद
CMS में हुए स्वागत समारोह में शुभांशु की मां आशा और बहन को मंच पर बुलाया गया। दोनों भावुक हो गईं। मां ने उन्हें गले लगाकर आँसू बहाए, तो शुभांशु भी भावुक नजर आए। छात्रों ने उनसे ट्रेनिंग में हुई असफलताओं के बारे में पूछा, जिसका उन्होंने धैर्यपूर्वक जवाब दिया और युवाओं को मेहनत करने तथा अपने सपनों को पूरा करने का आह्वान किया। CMS की चेयरपर्सन ने शुभांशु की पत्नी कामना से पूछा कि उन्होंने शुभांशु को क्यों चुना, तो कामना संकोच में थीं। शुभांशु ने कामना की दूरदर्शिता की प्रशंसा की, जिस पर सभी ने तालियाँ बजाईं और कामना मुस्कुराईं।
भारत के अंतरिक्ष मिशन की नई उम्मीदें
समारोह के दौरान शुभांशु ने मुख्यमंत्री को अंतरिक्ष में ली गई ब्रह्मांड की एक फोटो भेंट की। उन्होंने बताया कि सूर्य की किरणें पृथ्वी तक कितनी तेज गति से आती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है, जैसे सिर में सूजन, दिल की धड़कन धीमी होना तथा पेट के अंदर की चीजें तैरती हुई लगना। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में जीवित रहना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन मानव विज्ञान और इंजीनियरिंग ने इसे संभव बनाया है। उन्होंने 2027 में आने वाले गगनयान मिशन का जिक्र करते हुए STEM शिक्षा की अहमियत पर जोर दिया।
युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत और प्रदेश की प्रगति
शुभांशु शुक्ला की यात्रा भारत की अंतरिक्ष उड़ान के सफर में एक नया अध्याय है। यह युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी और उन्हें बड़े सपने देखने की हिम्मत देगी। उत्तर प्रदेश सरकार की छात्रवृत्ति, नए कोर्स और शुक्ला के अनुभव से प्रदेश और देश के युवाओं को अंतरिक्ष तकनीक में करियर बनाने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शुभांशु के अनुभव से जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और तकनीकी विकास जैसे क्षेत्रों में प्रदेश को मदद मिलेगी, जो पूरे भारत को लाभ पहुंचाएगा।
गौरवमय वापसी
शुभांशु शुक्ला ने लखनऊ में हजरतगंज स्थित नैमिषारण्य गेस्ट हाउस में अपना दिन विश्राम करते हुए बिताया। परिवार के साथ यह दिन उनके लिए गर्व और खुशी का था। शुभांशु की सफलता से न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे शहर और देश को गर्व महसूस हो रहा है। उनका ये सफर भारत को अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।




