योगी कैबिनेट ने प्रदेश में बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी को मंजूरी दे दी है जिसमें लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे को विशेष इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा। नीति के तहत मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट फोन्स, टेलीविजन, डिजिटल कैमरा, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, इन्वर्टर आदि के कंपोनेंट्स के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे प्रदेश में रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे तथा निवेश में भी वृद्धि होगी।
2015 से आज तक: मैन्युफैक्चरिंग में भारी वृद्धि
वर्ष 2015 में केवल 2 यूनिट्स मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में सक्रिय थीं, वहीं अब यह संख्या 300 पार कर चुकी है। इससे प्रदेश में प्रतिवर्ष 8 करोड़ मोबाइल बनने लगे हैं तथा 1.5 करोड़ लैपटॉप का निर्माण हो रहा है। आज स्टेट के 50% मोबाइल भारत में ही बन रहे हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 7,500 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करना है।
कौन-कौन से कंपोनेंट बनेंगे
नई पॉलिसी के तहत टच पैनल, सर्किट बोर्ड, डिस्प्ले, बैटरी, रियर कैमरा, सेंसर, चार्जिंग इंटरफेस, केबल्स, स्पीकर, कनेक्टर, माइक, इंटरनल मेमोरी, प्रोसेसर, रैम, स्मॉल पार्ट्स आदि का निर्माण होगा। खास बात है कि इनमें से कुछ कंपोनेंट्स पहले दूसरे देशों से आयात होते थे, लेकिन अब प्रदेश में ही बनेगें और ये देशहित में अच्छी बात है।
निवेश के लिए कंपनियों को मिलेगा प्रोत्साहन
सरकार ने तय किया है कि नई नीति के अनुसार कंपनियों को अगले 5 वर्षों तक कैपिटल सब्सिडी, स्टैम्प ड्यूटी छूट और बिजली बिल में राहत मिलेगी। 4 कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक्स ऑटो कंपोनेंट बनाना शुरू करने की अनुमति मिल गई है। 2022 से 4 कंपनियों ने लगभग 570 करोड़ रुपए का निवेश किया है और आगे 250 करोड़ निवेश प्रगति पर है।
स्वास्थ्य और शिक्षा में फैसले
- शाहजहांपुर में स्थापित होगा राज्य विवि।
- जीआईसी में 47 विशेष शिक्षक नियुक्त होंगे।
- 15 सीएचसी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध होंगी।
- वाराणसी में दिव्यांगजन के लिए स्मैकिंग केंद्र बनेगा।
नई नीति से यूपी प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अग्रणी बनने की राह पर है व आमजन के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। ये उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन इकॉनमी बनानें के भी दिशा में एक बड़ा कदम है।




