बुधवार (3 सितंबर) को सीएम योगी आदित्यनाथ ने आईआईटी कानपुर में आयोजित समन्वय उद्योग-अकादमिक सहभागिता कार्यक्रम में हिस्सा लिया और संबोधन किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारत को तकनीक और सतत विकास में वैश्विक नेता बनाने के लिए उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।
उनके अनुसार आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और स्थिरता जैसे प्रमुख क्षेत्र नवाचार और नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने में अहम हैं। इसके लिए उद्योग और शिक्षा जगत का सहयोग अनिवार्य है।
उद्योग-अकादमी सहयोग पर जोर
आदित्यनाथ ने जोर दिया कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों का सहयोग वैश्विक चुनौतियों को हल करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में जरूरी है। उन्होंने आईआईटी कानपुर के छह दशकों के तकनीकी योगदान की सराहना की। साथ ही उन्होंने इसे भारत की पहली डीप-टेक इंडिया 2025 पहल का नेतृत्व करने को कहा, जिसके लिए जमीन भी आवंटित की जा चुकी है।
अर्थव्यवस्था और उत्तर प्रदेश का बदलाव
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने भारत के आर्थिक इतिहास को बताया। उन्होंने कहा कि 17वीं सदी से पहले भारत का वैश्विक जीडीपी में 25% हिस्सा था, जो आजादी के समय 1947 में घटकर सिर्फ 2% रह गया। उन्होंने हाल के सुधारों का उल्लेख किया, जिनसे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। यह संभवतः दो साल में तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बदलाव को बताया। यह बदलाव बिहार-एमपी-राजस्थान-यू.पी (बीमारू) वाली पुरानी छवि को छोड़कर बेहतर कानून-व्यवस्था, निवेश और ढांचे से आया। उन्होंने बुंदेलखंड की प्रगति का जिक्र किया, जहां नल का पानी और किसानों की आय बढ़ी है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान से वन क्षेत्र भी बढ़ा है।
नवाचार में निवेश की अपील
योगी आदित्यनाथ ने उद्योग जगत से केवल मुनाफे पर ध्यान देने के बजाय नवाचार में पुनर्निवेश करने की अपील की। उन्होंने कोविड-19 संकट के समय आईआईटी कानपुर की भूमिका और डिफेंस कॉरिडोर व मेड-टेक सेंटर में इसके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रयास भारत को फिर से वैश्विक नेतृत्व दिला सकते हैं।
डीप-टेक भारत 2025 सम्मेलन का शुभारंभ
कार्यक्रम में भारत का पहला राष्ट्रीय डीप-टेक सम्मेलन डीप-टेक भारत 2025 लॉन्च हुआ, जिसमें DRDO, ISRO, MeitY और 200 से ज्यादा वेंचर कैपिटल कंपनियां शामिल रहीं। सम्मेलन का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्पेस टेक और बायोसाइंसेज पर है। इस अवसर पर डीप-टेक पॉलिसी 2035 और भारत का पहला AI सहायक भी लॉन्च किया गया। लक्ष्य है उत्तर प्रदेश को पहला डीप-टेक रेडी राज्य बनाना और 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को सहयोग देना।
प्रमुख उपस्थित लोग
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, आईआईटी कानपुर निदेशक प्रो. मनीन्द्र अग्रवाल, टीसीएस सीटीओ डॉ. हैरी क्वीन और उप-निदेशक प्रो. ब्रजभूषण मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में, अकादमिक और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग को आगे बढ़ा रही है। इसका उद्देश्य नवाचार, तकनीक और सतत विकास के जरिए एक विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत बनाना है।




