Sunday, May 10, 2026
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एक नाम, छह नौकरियां: अर्पित सिंह का 3 करोड़ की सैलरी वाला बड़ा फर्जीवाड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के शाहगंज क्षेत्र का रहने वाला अर्पित सिंह कई वर्षों से बड़ी चालाकी से सरकारी नौकरी कर रहा था। उसने छह अलग-अलग जिलों में अलग-अलग आधार नंबर दिखाकर नौकरी हासिल की।

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उत्तर प्रदेश में नौकरी का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आगरा के शाहगंज क्षेत्र का रहने वाला कथित अर्पित सिंह पुत्र अनिल कुमार सिंह अलग-अलग जिलों में अलग-अलग आधार नंबर प्रस्तुत कर नौकरी करता रहा। इस अजीब और हैरान कर देने वाले फर्जीवाड़े के बारे में जानते हैं।

छह जिलों में चोरी छुपे सरकारी नौकरी

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के शाहगंज क्षेत्र का रहने वाला अर्पित सिंह कई वर्षों से बड़ी चालाकी से सरकारी नौकरी कर रहा था। उसने छह अलग-अलग जिलों में अलग-अलग आधार नंबर दिखाकर नौकरी हासिल की। बलरामपुर, फर्रुखाबाद, रामपुर, बांदा, अमरोहा और शामली पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नाम, पिता का नाम और पता एक, आधार नंबर अलग

इस फर्जीवाड़े की सबसे बड़ी खास बात यह है कि अर्पित सिंह ने हर जगह अपना नाम, पिता का नाम और पता एक जैसा रखा, लेकिन हर जिले में अलग-अलग आधार नंबर दिखाए। यही असामान्यता जांच पड़ताल में पकड़ी गई और उसका जाल का पर्दाफाश हो गया।  

अमरोहा और शामली में आधार संख्या विवाद

अमरोहा जिले में अर्पित ने नगला खुबानी, कुरावली, मैनपुरी से आधार नंबर 339807337433 प्रस्तुत किया। लेकिन शामली में उसकी असली पहचान आगरा का रहने वाला बताई गई, वहीं उसका आधार नंबर भी असत्य पाया गया।

बलरामपुर में उसने आधार संख्या 525449162718 से नौकरी हासिल की, फर्रुखाबाद में 500807799459, रामपुर में 8970277715487, बांदा में 496822158342 नंबर से। हर जगह उसने एक ही नाम और पिता का नाम लेकर अलग-अलग आधार से नौकरी का झांसा दिया।

पिता का बयान और जांच का दायरा

अर्पित सिंह के पिता अनिल कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें अपने बेटे के इस फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं थी। बेटे की पहली नौकरी 2016 में जिला हाथरस में लगी थी। अब सभी छह जिलों की पुलिस उसकी नेटवर्किंग और काम करने के तरीके की जांच में जुट गई है।

सरकारी भर्ती प्रक्रिया में खामियां उजागर

यह मामला सरकारी भर्ती और पहचान के सत्यापन में बड़े सिंधांतपूर्ण कमियों को दर्शाता है। सवाल उठते हैं कि एक व्यक्ति इतने वर्षों तक छह जिलों में अलग-अलग आधार से नौकरी कैसे करता रहा और कोई रोक नहीं पाया।

उत्तर प्रदेश पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि ऐसे धोखाधड़ी को भविष्य में रोका जा सके।

UP4India Desk
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