प्रकाश पर्व दीपावली पर इस बार पटाखे सिर्फ रोशनी और आवाज़ ही नहीं करेंगे, बल्कि उनमें खुशबू भी होगी। पहले पटाखों से केवल धुआं और गंध निकलती थी, फिर उनमें अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल शुरू हुआ। अब लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) ने नई ग्रीन क्रैकर टेक्नोलॉजी बनाई है, जिससे पटाखे फूटने पर वातावरण में सुगंध भी फैलेगी।
दो दिवसीय स्टार्टअप कॉन्क्लेव
यह जानकारी सोमवार (15 सितंबर) को सीएसआईआर-एनबीआरआई में शुरू हुए दो दिवसीय स्टार्टअप कॉन्क्लेव के उद्घाटन पर दी गई। मंगलवार (16 सितंबर) को इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में कई उद्योग प्रतिनिधियों के साथ समझौते किए जाएंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने किया। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने में एनबीआरआई भी योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि अब सीएसआईआर सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन को आसान बना रहा है। किसानों को राष्ट्र की प्रगति में अहम मानते हुए उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को कृषि से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने वोकल फॉर लोकल और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) जैसे अभियानों को बढ़ावा देने की बात कही।
सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक कृषि को नया जीवन दे रहे हैं, नवाचार को प्रोत्साहित कर रहे हैं और समाज को सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने एनबीआरआई के जैव उर्वरक, सीमैप के अरोमा मिशन, आईआईटीआर के पर्यावरण डेटा समाधान और सीडीआरआई की व्यक्तिगत औषधि में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उनके अनुसार लखनऊ राष्ट्रीय नवाचार केंद्र के रूप में उभर रहा है और यहां वैज्ञानिक खोजों को उद्यमशीलता से जोड़ा जा रहा है।
इससे पहले अतिथियों ने प्रदर्शनी का दौरा किया और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। एनबीआरआई निदेशक डॉ. एके शासनी ने संस्थान के पौध विज्ञान, संरक्षण, अनुसंधान और किसानों व उद्योगों के लिए योगदान पर चर्चा की। सीमैप निदेशक डॉ. पीके त्रिवेदी और सीडीआरआई निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने भी लखनऊ की प्रयोगशालाओं और कॉन्क्लेव के महत्व को बताया।
अहम समझौते हुए
इस दौरान कुल चार महत्वपूर्ण समझौते हुए।
- आईआईटीआर लखनऊ और पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर, मोहाली के बीच पर्यावरण विज्ञान, विषविज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी में संयुक्त शोध व कौशल विकास।
- सीडीआरआई लखनऊ और वाराणसी की केनिसएआई टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के बीच एआई-आधारित दवा खोज और विकास पर पांच साल का समझौता।
- सीडीआरआई लखनऊ और हैदराबाद की वीजन लैब्स एलएलपी के बीच कैंसर अनुसंधान और किफायती दवा विकास पर तीन साल का सहयोग।
- आईआईटीआर लखनऊ और पुणे की स्मार्टक्यूआर टेक्नोलॉजीज के बीच बौद्धिक संपदा और पेटेंट हस्तांतरण, ताकि सीएसआईआर की तकनीक का व्यावसायिक और सामाजिक उपयोग हो सके।
उपमुख्यमंत्री ने इस मौके पर नवाचार करने वाले स्टार्टअप्स को सम्मानित भी किया। डॉ. देवेंद्र कुमार पटेल की प्रयोगशाला को नैनोकंपोजिट-आधारित जल शोधक विकसित करने के लिए और डॉ. प्रभांशु त्रिपाठी की प्रयोगशाला को कृत्रिम खाद्य रंगों से आंत माइक्रोबायोटा पर असर जानने के लिए विकसित बायोसेंसर पर सम्मान दिया गया।
कुल मिलाकर, इस कॉन्क्लेव ने यह संदेश दिया कि विज्ञान और नवाचार अब केवल शोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज, किसान और उद्योग की ज़रूरतों से सीधे जुड़े हुए हैं।




