उत्तर प्रदेश के संभल जिले से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण का बड़ा मामला सामने आया है। अलग-अलग गांवों में मदरसे, मस्जिद और मैरिज हॉल तक सरकारी भूमि पर बना दिए गए। इतना ही नहीं, तालाब की जमीन पर भी मकान बनाने का खुलासा हुआ है। शिकायत पर प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर जाकर जांच की। जांच में तथ्य सही पाए जाने के बाद अधिकारियों ने अवैध निर्माण पर लाल निशान लगाकर उन्हें चिन्हित कर दिया। साथ ही जिम्मेदारों को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है कि वे खुद ही निर्माण हटा लें, अन्यथा प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई करेगा।
गांव-गांव की जांच में उजागर हुए निर्माण
दरअसल, संभल प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि एचौड़ा कंबोह थाना क्षेत्र के सलेमपुर सालार गांव में सरकारी जमीन पर मदरसा बनाया गया है। जब तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह और नायब तहसीलदार की टीम वहां पहुंची तो जांच में साफ हो गया कि शिकायत सही है। नवीन पट्टी की सरकारी जमीन पर मदरसा बनाकर अवैध कब्जा किया गया था। अधिकारियों ने तुरंत ही जिम्मेदारों को नोटिस देते हुए स्पष्ट कर दिया कि एक हफ्ते के भीतर इस कब्जे को हटाना होगा।
इसके अलावा टीम असमोली थाना क्षेत्र के राया बुजुर्ग गांव भी पहुंची। यहां जांच में एक और चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। तालाब की भूमि पर मकान और मैरिज हॉल बना दिया गया था। वहीं, नवीन पट्टी की दूसरी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया। यह साफ तौर पर नियमों की अवहेलना थी। जांच पड़ताल के बाद प्रशासन ने इसे अवैध बताया और इन सभी स्थलों पर लाल निशान लगाकर हटाने का आदेश जारी कर दिया।
प्रशासन का अल्टीमेटम और संभावित कार्रवाई
तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने मामले में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि जिम्मेदारों को अंतिम मौका दिया गया है। उन्होंने मस्जिद कमेटी और अन्य लोगों को चेतावनी दी कि 20 सितंबर तक अवैध कब्जा हटाना अनिवार्य है। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि यदि इस अवधि के भीतर निर्माण नहीं गिराया गया तो बुल्डोजर चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि सरकारी जमीन का उपयोग निजी भवन, धार्मिक स्थल या व्यावसायिक संरचना खड़ी करने के लिए नहीं किया जा सकता। यहां पर मदरसा, मस्जिद और मैरिज हॉल बनाने के साथ-साथ तालाब की भूमि पर मकान बनाने जैसी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा है और ऐसे कब्जों की इजाजत किसी कीमत पर नहीं दी जाएगी।
आगे की स्थिति पर निगाह
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दिए गए समय सीमा के भीतर अवैध निर्माण हटाए जाते हैं या नहीं। अगर जिम्मेदार खुद ही निर्माण नहीं गिराते तो प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाने के संकेत पहले ही दे दिए गए हैं। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए कई जिलों में बुल्डोजर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस मामले में भी प्रशासन पीछे नहीं हटेगा।
संभल प्रशासन की इस सख्ती से यह साफ झलक रहा है कि सरकार अब अवैध निर्माण और जमीनों पर कब्जे के खिलाफ एक्शन मोड में है। यह कदम न केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि इससे भविष्य में होने वाले ऐसे कब्जों पर भी अंकुश लग सकता है।




