गाजा युद्ध पीड़ितों की मदद के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का यूपी एटीएस ने भंडाफोड़ किया है। महाराष्ट्र के तीन युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। आरोप है कि इन लोगों ने 20 राज्यों से करीब 2 करोड़ रुपये जुटाए और राशि का बड़ा हिस्सा खुद हड़प लिया।
गाजा पीड़ितों के नाम पर उगाही
एटीएस के मुताबिक आरोपियों ने गाजा युद्ध में पीड़ित महिलाओं और बच्चों की मदद के नाम पर सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया। इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ग्रुपों पर मार्मिक पोस्ट व वीडियो शेयर कर लोगों को कलेक्शन के लिए भावुक किया गया। इस बहाने यूपी सहित देश के कई राज्यों के लोगों को झांसा देकर करोड़ों जुटाए गए।
महिलाओं व बच्चों की मदद का दिखाया सपना
गिरफ्तार आरोपियों ने दावा किया था कि जुटाई गई रकम से जरूरतमंदों को खाना, कपड़े और दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन जांच में सामने आया कि रकम का बहुत बड़ा हिस्सा असली पीड़ितों तक पहुंचा ही नहीं। यूपी एटीएस अब रकम के गलत इस्तेमाल और यातायात की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
तीन आरोपी महाराष्ट्र से गिरफ्तार
गिरफ्तार युवकों की पहचान भिवंडी निवासी मोहम्मद अयान, अबू सूफियान और थाणे निवासी जैद नोटियार के रूप में हुई है। इनमें अयान मास्टरमाइंड बताया जा रहा है जबकि बाकी दोनों आरोपी स्थानीय वेयरहाउस में काम करते थे। एटीएस ने बीते 20 सितंबर को तीनों को भिवंडी से गिरफ्तार किया और न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया। अब वे न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।
खातों से संदिग्ध ट्रांजेक्शन
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने क्राउड फंडिंग के लिए कई बैंक खाते खोले। इन खातों में अचानक बड़ी रकम जमा होने पर बैंक अधिकारियों को शक हुआ और लेनदेन पर रोक लगा दी गई। इसके बावजूद उन्होंने अलग-अलग बैंकों में खाते खोले और पे-पाल एप के जरिए भी रकम ट्रांसफर की। संदेह है कि एक बड़ी राशि विदेश में संदिग्ध खातों तक पहुंचाई गई।
2 करोड़ की रकम, 15 लाख प्लेटफार्म को
अब तक की जांच के अनुसार आरोपियों ने करीब 2 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें से लगभग 15 लाख रुपये क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म पर भेजे। शेष पैसा बैंक खातों से निकालकर संदिग्ध खातों में जमा कराया गया। एटीएस को आशंका है कि रकम टेरर फंडिंग से भी जुड़ी हो सकती है।
यूपी से 60 लोग बने शिकार
सूत्रों का कहना है कि गाजा पीड़ितों को मदद देने के नाम पर हुई इस जालसाजी में सिर्फ यूपी के ही करीब 60 लोग फंस गए। इनके अलावा अन्य 20 राज्यों के लोग भी शिकार बने हैं। कई पीड़ितों की शिकायत के बाद ही यह मामला एटीएस के पास जांच के लिए आया था।
एटीएस की जांच जारी
एटीएस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गबन की गई 1.80 करोड़ रुपये की राशि किन-किन लोगों तक पहुंचाई गई। साथ ही यूरोप से मिले एक संदिग्ध व्यक्ति और आरोपियों के विदेशों से संपर्क की भी गहन पड़ताल हो रही है।




