Thursday, March 26, 2026
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सीपी राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने, 152 वोटों से मिली बड़ी जीत: भाजपा ने दक्षिण भारत में बनाई नई रणनीति

एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले। वहीं इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। इस तरह राधाकृष्णन ने 152 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

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सीपी राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। उन्होंने एनडीए उम्मीदवार के रूप में विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया। इस चुनाव ने केवल राजनीतिक गणित ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में दक्षिण भारत की राजनीति पर भी अहम असर डाला है।

राधाकृष्णन की जीत और वोटों का अंतर

एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले। वहीं इंडी गठबंधन के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। इस तरह राधाकृष्णन ने 152 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

विपक्ष ने दावा किया था कि इंडी गठबंधन को 315 सांसदों का समर्थन मिलेगा। लेकिन वास्तव में उसके उम्मीदवार को 15 वोट कम मिले। वोटिंग से पहले बीआरएस और बीजेडी ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। राज्यसभा में बीआरएस के 4 और बीजेडी के 7 सांसद हैं। वहीं लोकसभा में शिरोमणि अकाली दल के एकमात्र सांसद ने पंजाब में बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए मतदान से इनकार किया।

विपक्ष ने स्वीकार की हार

उपाध्यक्ष पद के लिए इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार रहे सुदर्शन रेड्डी ने परिणाम को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “आज सांसदों ने भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में अपना फैसला सुना दिया है। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अटूट विश्वास रखते हुए इस नतीजे को विनम्रता से स्वीकार करता हूं।” रेड्डी ने राधाकृष्णन को उनके नए पद की शुरुआत के लिए बधाई दीं।

देशभर से बधाइयों का सिलसिला

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि राधाकृष्णन का जीवन हमेशा वंचितों और गरीबों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वे संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उन्हें बधाई दीं। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन के पास सार्वजनिक जीवन का व्यापक अनुभव है, जो देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा।

दक्षिण भारत में भाजपा का दांव

भाजपा ने इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में दक्षिण भारत से चेहरा उतारा। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि दक्षिणी राज्यों में पार्टी की स्थिति कमजोर है।

  • आंध्र प्रदेश में भाजपा टीडीपी के साथ गठबंधन में सरकार चला रही है।
  • कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की सरकारें हैं।
  • तमिलनाडु में डीएमके और केरल में लेफ्ट सत्ता में है।

ऐसे में सीपी राधाकृष्णन की जीत भाजपा के लिए दक्षिण में राजनीतिक स्थिरता का प्रतीक मानी जा रही है।

तमिलनाडु और केरल पर भाजपा की नजर

2026 में तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होंगे। भाजपा की रणनीति है कि वह इन दोनों राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करे।

  • 2021 के तमिलनाडु चुनाव में भाजपा ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 4 सीट जीतीं। उस समय उसका वोट शेयर केवल 2.6 प्रतिशत था।
  • केरल में मौजूदा विधानसभा में भाजपा का एक भी सदस्य नहीं है। 2021 चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला था।
  • इन परिस्थितियों में पार्टी चाहती है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के संदेश के जरिए भविष्य के विधानसभा चुनावों में माहौल बनाया जाए।

विचारधारा पर आधारित चुनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव विचारधारा पर केंद्रित रहा। आमतौर पर इस पद का चुनाव भाषा या क्षेत्रीय पहचान पर भी असर डालता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं, फिर भी डीएमके ने उन्हें एक भी वोट नहीं दिया। दूसरी ओर विपक्षी उम्मीदवार रेड्डी तेलुगु भाषी थे, लेकिन उन्हें आंध्र प्रदेश की टीडीपी और वाईएसआरसीपी से भी समर्थन नहीं मिला।

मतलब साफ था कि दोनों उम्मीदवारों को केवल अपने-अपने गठबंधन यानी एनडीए और इंडिया के सांसदों का ही समर्थन मिला।

नतीजों से निकला राजनीतिक संकेत

इस चुनाव से स्पष्ट संकेत यह निकला कि एनडीए और इंडिया, दोनों ही गठबंधन अपने-अपने खेमे में मजबूती बनाए हुए हैं। वहीं, क्षेत्रीय दल जैसे टीडीपी, वाईएसआरसीपी, बीआरएस और बीजेडी ने यह संदेश दिया कि वे अपने संगठनात्मक निर्णयों से ही चलेंगे।

सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति चुना जाना केवल एक संसदीय चुनाव की जीत भर नहीं है। यह भाजपा के दक्षिण भारत की राजनीति में नए समीकरण बनाने का एक प्रयास है। आने वाले वर्षों में जब तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होंगे, तब इसका प्रभाव और गहराई से दिखाई देगा।

UP4India Desk
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