पयागपुर के उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) अश्विनी कुमार पांडेय ने पीटीआई को बताया कि ज़िला प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पयागपुर तहसील के तहत पहालवारा गाँव में तीन मंज़िला इमारत के भीतर एक अवैध मदरसा संचालित हो रहा है।
उन्होंने कहा, “बुधवार (24 सितंबर) को जब हम निरीक्षण के लिए इमारत में गए, तो मदरसा संचालकों ने पहले हमें ऊपर जाने से रोकने की कोशिश की। पुलिस की मौजूदगी में हम परिसर में दाखिल हुए और छत पर बने शौचालय को बंद पाया।”
शौचालय से निकलीं डरी-सहमी छात्राएँ
महिला पुलिसकर्मियों द्वारा दरवाज़ा खोलने पर 9 से 14 वर्ष की उम्र की 40 छात्राएँ एक-एक कर बाहर आईं। एसडीएम ने कहा, “लड़कियाँ डरी हुई दिखीं और साफ़-साफ़ कुछ भी नहीं कह पा रही थीं।”
अधिकारियों ने पुष्टि की कि ग्रामीणों को लंबे समय से शक था कि मदरसे में कुछ संदिग्ध गतिविधियाँ हो रही हैं। स्थानीय लोगों ने कई शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन्हीं शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए एसडीएम पुलिसकर्मियों और महिला कांस्टेबलों के साथ छापेमारी के लिए पहुँचे।
छापे के दौरान मदरसा संचालक खलील अहमद ने टीम को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की। हालाँकि, पुलिस हस्तक्षेप के बाद टीम इमारत में दाखिल हुई और तलाशी शुरू की।
पांडेय ने कहा, “निरीक्षण के दौरान हमें एक बड़ा तीन मंज़िला भवन मिला। तीसरी मंज़िल की जाँच करने पर हमने 9 से 14 साल की उम्र की 40 नाबालिग लड़कियों को बाथरूम के अंदर बंद पाया। महिला पुलिसकर्मियों की मदद से छात्राओं को तुरंत बाहर निकाला गया और संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया।”
पंजीकरण और वैधता पर सवाल
एसडीएम ने बताया कि ज़िला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद खालिद को संस्था के पंजीकरण और वैधता की जाँच के लिए कहा गया है। खालिद के अनुसार, स्थानीय लोगों ने बताया कि मदरसा लगभग तीन साल से बिना पंजीकरण के चल रहा था।
उन्होंने कहा, “प्रबंधन और कर्मचारी पंजीकरण या वैधता से संबंधित कोई भी दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सके। 2023 के सर्वे के दौरान बहराइच में 495 अवैध मदरसे पहचाने गए थे और लगता है कि यह मदरसा उस समय सर्वे टीम की नज़र से बच गया।”
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने अब तक ऐसे अवैध मदरसों के संबंध में कोई स्पष्ट नीति जारी नहीं की है। पिछले साल कुछ मदरसे सील किए गए थे, लेकिन उनके प्रबंधकों ने हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया। जल्द ही सरकार से नए नियामक ढाँचे की उम्मीद है।
छात्राओं को घर भेजा गया
खालिद ने आगे कहा, “पूछताछ के दौरान हमने पूछा कि आठ कमरे होने के बावजूद लड़कियाँ शौचालय में क्यों छिपीं, जिस पर एक शिक्षिका तकसीम फ़ातिमा ने जवाब दिया कि हंगामे में छात्राएँ घबरा गईं और खुद को अंदर बंद कर लिया।”
उन्होंने बताया कि मदरसे के रिकॉर्ड की जाँच की जा रही है और इसे बंद करने के आदेश दिए जा चुके हैं। “प्रबंधन को छात्राओं को सुरक्षित उनके घर भेजने को कहा गया है और लगता है सभी अपने घर पहुँच चुकी हैं,” खालिद ने कहा।
छापे के दौरान भाग निकला संचालक
ज़िला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद खालिद ने यह भी पुष्टि की कि वर्तमान में ज़िले में 495 अपंजीकृत मदरसे संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि घटना की विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। छापे के दौरान मदरसा संचालक खलील अहमद मौके से भागने में सफल रहा।
हालाँकि, उसकी बेटी फ़ातिमा ने आरोपों से इंकार किया। उसने दावा किया कि यह इमारत मदरसा नहीं बल्कि कोचिंग सेंटर है। उसने आगे कहा कि छापे के बाद सभी छात्राओं को उनके माता-पिता अपने साथ ले गए।
स्थानीय विरोध और संपत्ति पर सवाल
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कड़ी प्रतिक्रियाएँ पैदा कर दी हैं। ग्रामीणों ने मदरसा संचालक की अचानक बढ़ी संपत्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि खलील, जो एक दशक पहले जूते-चप्पल की छोटी सी दुकान चलाता था, अब तीन मंज़िला इमारत और 24 दुकानें का मालिक है।
कुछ ग्रामीणों ने इस मामले को हाल ही में उजागर हुए उतराौला के छंगुर बाबा प्रकरण से जोड़ा, जिसमें अवैध धार्मिक और वित्तीय गतिविधियाँ सामने आई थीं। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जाँच की माँग की।
पुलिस कार्रवाई का इंतज़ार
शहर के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) रमनंद प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “अभिभावकों, एसडीएम या अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी में से किसी ने भी अब तक मामला दर्ज कराने के लिए संपर्क नहीं किया है। यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उपयुक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
एसडीएम पांडेय ने पुष्टि की कि घटना की विस्तृत रिपोर्ट पहले ही ज़िला अधिकारी को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई, जिसमें ईडी जाँच की संभावना भी शामिल है, उच्चाधिकारियों के निर्देशों पर निर्भर करेगी।




