मानसून की मूसलधार बारिश ने उत्तर भारत को झकझोर कर रख दिया है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उफनती नदियों, बांधों से छोड़े गए पानी और लगातार बारिश ने सड़कों को डुबो दिया है, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है और हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है। जनहानि, आवश्यक सेवाओं के ठप होने और राहत-बचाव अभियानों के बीच हालात गंभीर बने हुए हैं।
पंजाब में दशकों बाद सबसे भयावह बाढ़
पंजाब इस बाढ़ संकट से सबसे अधिक प्रभावित है। 1 अगस्त से अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है और 12 जिलों में 2.56 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अगस्त महीने में राज्य में 253.7 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 74% ज्यादा है और पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक है। सतलुज, ब्यास और रावी नदियां हिमाचल और जम्मू क्षेत्र में भारी बारिश के बाद उफान पर हैं, जिससे बाढ़ की स्थिति बिगड़ गई है।
पठानकोट जिले में सबसे ज्यादा छह मौतें दर्ज की गईं। अमृतसर, बरनाला, होशियारपुर, लुधियाना, मानसा, रूपनगर, बठिंडा, गुरदासपुर, पटियाला, मोहाली और संगरूर सहित 10 से अधिक जिले डूब गए हैं। मकानों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार ने एहतियातन सभी कॉलेज, विश्वविद्यालय और पॉलिटेक्निक संस्थान 3 सितंबर तक बंद कर दिए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड ने अब तक 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है और 21 टन से अधिक राहत सामग्री पहुंचाई है। हेलिकॉप्टर, इंजीनियर और मेडिकल टीमें लगातार राहत कार्यों में जुटी हैं।
हिमाचल प्रदेश में 76 साल का सबसे बरसाती अगस्त
हिमाचल प्रदेश ने 1949 के बाद से अब तक का सबसे बरसाती अगस्त देखा। राज्य में 431.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य (256.8 मिमी) से 68% अधिक है। 1901 से रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह नौवां सबसे अधिक बरसाती अगस्त है। लगातार बारिश से शिमला और सोलन जिलों में भारी भूस्खलन और नुकसान हुआ, जिससे रेलवे सेवाएं और जलापूर्ति प्रभावित हुई। शिमला में तीन लोगों की मौत भूस्खलन से हुई।
चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग मानसर के पास भूस्खलन से अवरुद्ध हो गया। कालका-शिमला के बीच कई ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। स्कूल-कॉलेज बंद हैं और प्रशासन लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे से निपट रहा है।
जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन का कहर
जम्मू-कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। कटरा में माता वैष्णो देवी यात्रा सातवें दिन भी रुकी हुई है। 26 अगस्त को हुए भूस्खलन में 34 लोगों की मौत हो चुकी है। श्राइन बोर्ड ने यात्रा बहाल होने तक सभी बुकिंग रद्द कर दी हैं और पूरा पैसा लौटाने का फैसला किया है।
इसी बीच केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन से दो श्रद्धालुओं की मौत और छह घायल हुए। इसके बाद चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्राएं 5 सितंबर तक स्थगित कर दी गईं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू में बाढ़ राहत की उच्चस्तरीय बैठक की और स्थिति की निगरानी के निर्देश दिए।
दिल्ली-एनसीआर में बाढ़ का खतरा
दिल्ली में भी अगस्त में 399.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे ज्यादा है। यमुना नदी इस समय खतरे के निशान से नीचे लेकिन चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही है। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी चिंता बढ़ा रहा है। दिल्ली के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से लोगों को निकालने की तैयारी करने और तटबंधों की 24 घंटे गश्त के आदेश दिए हैं।
राजधानी में 1 सितंबर को आंधी-तूफान, बिजली गिरने और भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, गैर-जरूरी यात्रा से बचने और सुरक्षा उपायों का पालन करने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश में सोमवार से शुरू हुए बारिश का सिलसिला मंगलवार तक जारी रहा, जिससे कई जिलों में भारी जलभराव और राहत-बचाव के कार्य चल रहे हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर जैसे पश्चिमी तराई के जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट और प्रदेश के 22 अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इस वजह से मेरठ, बरेली, बिजनौर, मुरादाबाद, रायबरेली और अलीगढ़ जैसे जिलों में मंगलवार को अवकाश घोषित किया गया। राजधानी लखनऊ में भी बादलों ने जोरदार बारिश की, जिससे तापमान में गिरावट आई और मौसम खुशनुमा हुआ। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसूनी बारिश 3 सितंबर के बाद धीरे-धीरे कम होगी और अगले कुछ दिनों में तेज धूप के साथ तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। इस अवधि में प्रदेश में बारिश के कारण सतर्कता बरतने और सतत अपडेट्स के अनुसार व्यवहार करने की अपील की गई है।
आगे की चुनौती और सावधानियां
उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अनुमान है। एनडीआरएफ और राज्य आपदा बल लगातार राहत-बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। प्रशासन ने लोगों को भारी बारिश के दौरान घरों में रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है, ताकि बाढ़, भूस्खलन और जलभराव से होने वाले खतरों को कम किया जा सके।
यह बाढ़ आपदा हाल के दशकों में क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदियों में से एक मानी जा रही है, जिसने व्यापक जनहानि, ढांचागत नुकसान और आर्थिक हानि पहुंचाई है। सामान्य स्थिति बहाल करने और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।




