उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंगलवार को अपनी कैबिनेट बैठक में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जुड़े कई अहम फैसले लिए हैं। अब प्रदेश में सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती सरकार की निगरानी में एक निगम के माध्यम से की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को बेहतर वेतन, सुविधाएं और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। इसी बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, लखनऊ-कानपुर में ई-बस सेवा शुरू करने समेत अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए।
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में नया बदलाव
योगी कैबिनेट ने प्रदेश में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती के लिए “उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड” बनाने का निर्णय लिया है। यह निगम सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति करेगा। अब इस प्रक्रिया में सरकार निजी एजेंसियों के बजाय खुद नियुक्ति करेगी। भर्ती के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू भी अनिवार्य होगा। निगम जेम पोर्टल के माध्यम से आवेदनों को स्वीकार करेगा और योग्य अभ्यर्थी की अंतिम सूची संबंधित विभाग को देगा। नियुक्ति तीन साल के लिए होगी और बाद में रिन्यूअल किया जाएगा।
वेतन और सुविधाएं
फायदे की बात यह है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने 16 से 20 हजार रुपए तक मानदेय मिलेगा। वेतन कर्मचारी के खाते में प्रत्येक माह की 1 से 5 तारीख के बीच जाएगा। इसके साथ ही पीएफ और ESIC जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। महिला कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह मातृत्व अवकाश मिलेगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि स्थायी पदों पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती नहीं होगी, बल्कि वे नियमित सरकारी भर्ती प्रक्रिया से ही होंगी।
यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों का बजट और भर्ती प्रक्रिया
प्रदेश में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का बजट पिछले छह वर्षों में लगभग पौने तीन गुना बढ़ चुका है। 2019-20 में इसका बजट 684.19 करोड़ रुपये था, जो अब 2025-26 में 1796.93 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पुराने व्यवस्था के तहत जेम पोर्टल पर टेंडर निकाले जाते थे और एजेंसियां भर्ती करती थीं, लेकिन शिकायतों के कारण अब यह जिम्मेदारी निगम को दी जा रही है जिससे पारदर्शिता और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा बढ़ेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा
कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की नीति को मंजूरी दी है जिसके तहत अगले 6 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स के 11 महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस नीति के तहत निवेशकों को सब्सिडी और अन्य लाभ दिए जाएंगे। आगामी 5 सालों में 500 मिलियन डॉलर का निवेश लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से 50% निवेश यूपी में ही होगा। इससे चीन पर देश की निर्भरता कम होगी और निर्यात में वृद्धि होगी।
लखनऊ-कानपुर में ई-बस सेवा
नगर विकास और ऊर्जा मंत्री ने लखनऊ और कानपुर के लिए नए ई-बसों के संचालन को मंजूरी दिलाई है। इस योजना के तहत, दोनों शहरों के 10-10 रूट्स पर 12 साल के लिए लग्जरी इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। यह बसें निजी ऑपरेटर द्वारा नेट कॉस्ट बेसिक कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर संचालित की जाएंगी। सरकार बसों की चार्जिंग और लाइसेंसिंग की व्यवस्था करेगी, जबकि किराया सरकार तय करेगी। शुरुआत में प्रत्येक रूट पर एक बस चलाई जाएगी और बाद में संख्या बढ़ाई जाएगी।
योगी सरकार ने आउटसोर्सिंग कर्मियों के हितों की रक्षा, बेहतर वेतनमान और पारदर्शी भर्तियों के उद्देश्य से बड़े सुधार किए हैं। साथ ही, प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश और शहरी परिवहन में ई-बस योजना को भी मंजूरी दी गई है, जो प्रदेश के सर्वांगीण विकास में सहायक साबित होगी। इस तरह की पहलें प्रदेश में रोजगार, सुगमता और आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
सभी फैसले प्रदेश सरकार के बेहतर प्रशासन और विकास के लक्ष्यों के अनुरूप हैं, जो कर्मचारियों को सुरक्षा के साथ-साथ प्रदेश के उद्योगों व शहरों को भी मजबूती प्रदान करेंगे।




