भूटान के प्रधानमंत्री दासो शेरिंग तोबगे शुक्रवार (5 सितंबर) सुबह रामनगरी अयोध्या पहुंचे। वे अपनी पत्नी ओम ताशी डोमा के साथ 3 से 6 सितंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान वे गया, अयोध्या और दिल्ली का दौरा कर रहे हैं। अयोध्या प्रवास को भारत-भूटान संबंधों की गहराई और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।
रेड कार्पेट स्वागत और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
शुक्रवार सुबह 9:30 बजे उनका विमान महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, जहां उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से उनका काफिला सुरक्षा घेरे में राम मंदिर की ओर बढ़ा। पूरे शहर में चप्पे-चप्पे पर PAC, CRPF, SSF, ATS, STF और सिविल पुलिस के जवान तैनात रहे। राम मंदिर जाने वाली एक लेन को विशेष रूप से सुरक्षा के लिए बंद किया गया ताकि प्रधानमंत्री का काफिला बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन
भूटान के प्रधानमंत्री ने राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे हनुमानगढ़ी समेत अन्य प्रमुख मंदिरों में भी दर्शन करने पहुंचे। लगभग चार घंटे के अयोध्या प्रवास में धार्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का पूरा माहौल देखने को मिला।
उनके सम्मान में जिला प्रशासन की ओर से विशेष दोपहर भोज का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रदेश सरकार और केंद्र के मंत्री भी शामिल हो सकते हैं। भोज के बाद प्रधानमंत्री तोबगे दोपहर 1:30 बजे अयोध्या से दिल्ली रवाना होंगे।
भारत-भूटान संबंधों को नई मजबूती
प्रधानमंत्री तोबगे का यह दौरा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। भारत और भूटान के संबंध 1865 की सिनचुला संधि से शुरू हुए थे और आज ये दक्षिण एशिया की शांति और सहयोग में अहम भूमिका निभा रहे हैं। चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच भूटान भारत का विश्वसनीय सहयोगी देश माना जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री तोबगे का अयोध्या पहुंचकर सनातन परंपरा से जुड़ना इन संबंधों को और गहराई देगा।
नालंदा विश्वविद्यालय और राजगीर स्थित रॉयल भूटान मंदिर के दौरे के बाद अयोध्या प्रवास ने इस यात्रा को और ऐतिहासिक बना दिया है। यह यात्रा केवल धार्मिक जुड़ाव का प्रतीक नहीं, बल्कि यह दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को उच्च स्तर तक ले जाने का अवसर भी है।




